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बिहार के ये बच्चे चलती ट्रेन से बरसाते हैं बम

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Posted on: 21 Feb, 2019 Tags  

BiharonWeb: 21 Feb, 2019,

धरती को बचाने का लिया है संकल्प

बिहार के ये बच्‍चे एक दिन में सैकड़ों बम बनाते और उन्‍हें चलती ट्रेनों से बरसाते हैं। यह पढ़ कर आप एकदम से चौंक गए होंगे। चौंकिए नहीं, ये कोई विस्‍फोट करने वाले बम नहीं, बल्कि इनसे जीवन के अंकुर फूटते हैं। ये बम हरियाली बढ़ाते हैं। हम बात कर रहे हैं पटना की एक संस्‍था ‘तरुमित्र’ की, जिसके तत्वावधान में छात्र-छात्राओं के द्वारा 'बीज बम’ बनाए जाते हैं। तरुमित्र आश्रम में देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बच्‍चे कई प्रजातियों के पेड़ों के बीजों का संग्रह करते हैं। फिर बीज के चारों ओर मिट्टी लपेटकर गोला बनाते हैं, जिन्‍हें बीज बम कहा जाता है। इन बमों को खाली या बंजर भूमि में फेंक दिया जाता है, जहां कुछ दिनों बाद पौधे उग आते हैं।

इस वर्ष जुलाई तक चलेगा अभियान

कटते पेड़ व बंजर होती धरती मानव जाति के लिए गंभीर संकट का संकेत देने लगी है। यदि हरियाली बचाने के लिए ठोस प्रयास नहीं किये गए तो पृथ्वी मरुभूमि में तब्दील हो जाएगी। धरती को बचाने का संकल्प लिया है इन छात्र-छात्राओं ने। पटना 大富豪国际网址के तरुमित्र आश्रम में प्रतिदिन देश के कोने-कोने से विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों से छात्र-छात्राओं की टीम आती है। टीम बीज बम बनाती है। बीते वर्ष शुरू किया गया यह काम इस वर्ष फिर शुरू किया गया है। यह कार्यक्रम जुलाई महीने तक चलेगा।

रोजाना बनाते 200 से 300 बीज बम, फिर चलती ट्रेनों से फेंकते

यहां पर प्रतिदिन 200 से 300 बीज बम बनाए जाते हैं। इनका उपयोग जुलाई से सितंबर तक किया जाता है। इन बमों को लेकर छात्र-छात्राओं की टीम ट्रेनों पर सवार हो जाती है। टीम पटना-बक्सर, पटना-गया, पटना-देवघर सहित विभिन्न रूटों पर सफर करती है। टीम में शामिल बच्चे चलती ट्रेन से ट्रैक के दोनों तरफ 'बम' फेंकते जाते हैं। इसके अलावा एक टीम गंगा और राज्य के अन्य नदियों के किनारे-किनारे वाहन से सफर करती है। इस टीम में शामिल छात्र भी बम फेंकते जाते हैं।

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दिखने लगे बेहतर परिणाम, बंजर भूमि पर भी आई हरियाली

यह सिलसिला पिछले वर्ष शुरू किया गया था। जुलाई में बम फेंकने के बाद सितंबर में सर्वे किया गया। इसका काफी बेहतर परिणाम देखने को मिला। जिन जगहों पर अब तक कोई पौधा नहीं दिखाई देता था, वहां धीरे-धीरे हरियाली दिखाई देने लगी है। जल्द ही ये पौधे पेड़ों में तब्दील हो जाएंगे।

आश्रम के पेड़ों से गिरे बीजों का सालों भर होता है संग्रह

तरुमित्र के निदेशक फादर रॉबर्ट का कहना है कि पर्यावरण को समर्पित संगठन द्वारा बीज बम बनाने के लिए सालों भर आश्रम के पेड़ों से गिरे बीजों का संग्रह किया जाता है। बीजों का संग्रह करने के बाद छात्र-छात्राओं की टीम आश्रम में आने के बाद बीज बम बनाती है। गीली मिट्टी के गोले में एक बीज को डाला जाता है। इसे बनाने में काफी उर्वर मिट्टी का ही उपयोग किया जाता है, ताकि बंजर भूमि में गिरने पर भी बरसात के दिनों में बीज उग सकें।

बच्‍चों के लिए लक्ष्‍य निर्धारित, कदंब से कहवा तक को बढ़ावा

大富豪国际网址 स्कूली बच्चे कदंब, कहवा, आम, बरगद, जामुन, महुआ, पाटली आदि के बीज बम बड़े पैमाने पर बना रहे हैं। यहां पर हर छात्र के लिए कम से कम 100 बीज बम बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रकृति की रक्षा करने व इसे खूबसूरत बनाने में संस्था की देखरेख में इन बच्चों का सहयोग सराहनीय हैै।

Edited by Ashutosh

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