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महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कानून की बिहार में उड़ रही धज्जियां

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Posted on: 25 Oct, 2018 Tags  

BiharonWeb: 25 Oct, 2018,

बिहार के 90 फीसदी कार्यालयों में सुप्रीम कोर्ट के कानून का नहीं हो रहा अनुपालन

महिलाओं के कार्यस्थलों पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) कानून 2013 मौजूद है। दिसम्बर 2013 में इसके नियम भी जारी कर दिए गए हैं। लेकिन, बिहार में इन नियमों के प्रति सरकार के उदासीनता का प्रमाण मिलता है। वर्ष 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम को पारित किया गया था। जिन संस्थाओं में 10 से अधिक लोग काम करते हैं, वहां यह अधिनियम लागू होता है और वहां आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करना अनिवार्य है। लेकिन, बिहार के सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में काम करने वाली महिलाओं की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से विशाखा गाइडलाइन大富豪国际网址 जारी होने के बावजूद यहां के 90 फीसदी कार्यालयों में अब तक आईसीसी का गठन नहीं हो सका है। प्राइवेट संस्थानों की बात तो दूर, सरकारी कार्यालयों व संस्थानों में भी इसका पालन नहीं हो रहा। इसके प्रति समाज कल्याण विभाग और महिला विकास निगम भी सजग नहीं है। विभाग और निगम के पास आंकड़ा तक नहीं है कि किस कार्यालय में आईसीसी का गठन हुआ और कोई शिकायत मिली या नहीं ? ऐसी स्थिति में कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को थाना पुलिस और कोर्ट में जाने का अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। इसका खुलासा हेल्पिंग ह्यूमन संस्था के स्टेट प्रेसिडेंट रंजीत कुमार द्वारा आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ। रंजीत ने जब समाज कल्याण विभाग के प्रधान सचिव से इस सबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने पत्र को महिला विकास निगम में भेज दिया। बता दें कि आईसीसी पर निगरानी रखने की जिम्मेवारी महिला विकास निगम की है।

कई विभागों से नहीं मिला जवाब

大富豪国际网址 रंजीत कुमार के अनुसार उन्होंने लगभग सभी सरकारी विभागों में आंतरिक व स्थानीय शिकायत समिति के गठन से संबंधित सूचना मांगी। विभागाध्यक्षों ने जिला मुख्यालय को पत्राचार कर सूचना उपलब्ध कराने के लिए लिखा। लेकिन, ज्यादातर कार्यालयों से सूचना प्राप्त नहीं हुई। वहीं, कुछ जगह से गोल-मोल जवाब मिले। जवाब देने वाले अधिकांश लोक सूचना पदाधिकारियों ने कहा कि इस संबंध में सरकार या विभाग स्तर से आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए समिति का गठन नहीं किया गया।

विभागों और कार्यालयों से मिले ऐसे जवाब

- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंडारक (पटना) : न अब तक कोई शिकायत मिली और न ही आइसीसी का गठन हुआ।
- सदर अस्पताल, बिहारशरीफ (नालंदा) : आईसीसी का गठन नहीं हुआ।
- बिहार सूचना आयोग (पटना) : आयोग के अभिलेखों में इस प्रकार की कोई सूचना संधारित नहीं है।
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (महाप्रबंधक, नेटवर्क-1) : शाखा के स्तर पर आईसीसी के गठन का कोई प्रावधान नहीं है और स्थानीय शिकायत समिति सरकारी विभागों में अनिवार्य है, बैंक के अंदर नहीं।
- सिविल सर्जन कार्यालय, नवादा : सरकार या स्वास्थ्य विभाग से आदेश प्राप्त होने के बाद समिति का गठन किया जाएगा।
- जयप्रभा अस्पताल, कंकड़बाग (पटना) : आईसीसी का गठन नहीं हुआ है।
- गया नगर निगम : आईसीसी का गठन स्थापना शाखा, गोपनीय शाखा और सामान्य शाखा से नहीं हुआ है।
- न्यू गर्दनीबाग अस्पताल (पटना) : संस्थान में महिला कर्मियों की शिकायत के लिए कोषांग का गठन नहीं हुआ है।
- राजकीय औषधि सह उपचार गृह, नया सचिवालय (पटना) : आईसीसी का गठन करने के लिए उच्चाधिकारियों से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, खुसरूपुर (सहित प्रखंड के तीन अस्पताल) : आतंरिक शिकायत समिति का गठन नहीं हुआ है।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मनेर (सहित पांच अस्पताल) :大富豪国际网址 आईसीसी का गठन नहीं हुआ।

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क्या है विशाखा गाइडलाइन ?

大富豪国际网址 राजस्थान की भंवरी देवी के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला वर्ष 1997 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। वर्ष 2013 में अंतिम सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर आदेश जारी किया था, जिसका नाम विशाखा गाइडलाइन दिया गया। इसके तहत केंद्र सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित कानून को मंजूरी दी। किसी महिला को गलत तरीके से छूना, घूरना, यौन संबंध बनाने के लिए कहना, अश्लील इशारे व चुटकुले सुनाना, पॉर्न फिल्म या क्लिप दिखाना जैसी वारदातों को विशाखा गाइडलाइन के तहत यौन उत्पीड़न माना गया है। महिलाएं आरोपित कर्मी या अधिकारी के विरुद्ध शिकायत कर सकें, इसके लिए 10 या उससे अधिक कर्मचारी वाले दफ्तर में आईसीसी का गठन करना अनिवार्य है। यह अधिनियम, 9 दिसम्बर, 2013 को प्रभाव में आया था। इस अधिनियम को निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से सुरक्षा के लिये कानूनी अनिवार्यता के अन्तर्गत लिया गया है। लेकिन, कुछ बड़े संगठनों को छोड़कर, अधिकांश संगठन प्रावधान के साथ जुड़े हुए नहीं हैं। यहां तक की, वहां आन्तरिक शिकायत समिति भी नहीं है। इस प्रकार, आने वाला समय ही बता सकता है कि पारित हुआ अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न को रोकने और निषेध करने में सफल हो पायेगा या नहीं ? बहरहाल, अबतक तो यह असफल होता ही प्रतीत हो रहा है, जो निराशाजनक है।

Edited by Ashutosh

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