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पॉपुलर बिहारी संगीतों में अश्लीलता के खिलाफ कई बार उठी आवाज, नहीं हो रहा है असर

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Posted on: 15 Jun, 2018 Tags  

BiharonWeb: 15 Jun, 2018,

गीत-संगीत के नाम पर परोसी जा रही है अपसंस्कृति

'मस्टरवा मांगे ला चुम्मा' जैसे अश्लील गाने समाज में घोल रहे हैं 'जहर'

बिहार में यात्री वाहनों में व उत्सवों-पूजा समारोहों में आपत्तिजनक और अश्लील गीत बजाने पर विधिगत कार्यवाई का आदेश जारी है। इसके बावजूब, अश्लील गीतों पर रोक नहीं लग पा रही है। यहां गीत- संगीत के नाम पर अपसंस्कृति परोसे जाने का चलन बढ़ता जा रहा है। अश्लील गीतों से आये दिनों यात्रियों को परेशानी हो रही है। परिवहन अधिनियम का पालन नहीं हो रहा है। सड़क पर चलने वाली तमाम सवारी गाड़ियों में अश्लील गाने बजने से महिलाओं समेत अन्य यात्रियों को परेशानी हो रही है। परिवहन विभाग के नियम के विरुद्ध जाकर गाने बजाये जा रहे हैं। तेज आवाज में अश्लील गाना बजने के कारण वाहन दुर्घटना होने की भी आशंका बनी रहती है। दिन-प्रतिदिन द्विअर्थी गाने बजाने की प्रवृत्ति बढ़ने से हर तरह के यात्रियों को परेशानी होती है। राज्य के तमाम जिलों की सभी मुख्य सड़कों पर चलने वाले बस, टेम्पू, जीप व अन्य सवारी वाहनों में लगातार तेज आवाज में अश्लील गाने बजाये जाते हैं। इससे ध्वनि प्रदूषण भी फैलता है। परिवहन विभाग के नियम के प्रतिकूल वाहन चालक अपनी मनमानी करते हैं। लेकिन, इस पर कभी कार्रवाई नहीं की जाती है। बस और टेम्पू स्टैंडों में तो अश्लील गानों से उबाऊ माहौल बना रहता है। निम्नस्तरीय गानों से परिवार के साथ सफर कर रहे लोगों को काफी परेशानी होती है। बिहार के कई क्षेत्रों में अश्लील गानों को लेकर घटनाएं भी हुई हैं। यात्रियों व चालकों के बीच कई दफा मारपीट का मामला सामने आया है। पुलिस थाने में मामले भी दर्ज हुए हैं, लेकिन कोई कार्यवाई नहीं हुई है। आजकल बिहार मे भोजपुरी अश्लील गानों का इस कदर बोलबाला हो गया है कि विवाह के समय शहर में अलग-अलग जगहों से गुजरते हुए भोजपुरी की भाषाई ऑडियो संस्कृति से भी दो चार होना पड़ रहा है। सुनने के बाद तो खुद में इतनी शर्मिंदगी महसूस होती है कि लगता है क्या किया जाए... डीजे के नाम पर दिल में दर्द देने वाली आवाज़ से वृद्ध व मरीजों को खासी परेशानी होती है। जिन अश्लील भोजपुरिया गानों पर ठुमके लगाये जाते हैं वे महिलाओं के कानों में भी पड़ते हैं। लेकिन, न ही कोई आवाज उठाता है, न ही कोई कार्यवाई होती है। भोजपुरी गाने जैसे कमरिया करे लपालप, चुम्मा मांगेला मस्टरवा समेत तमाम वाहियात गाने हमारे समाज में जहर घोल रहे हैं। प्रशासन सिर्फ फरमान सुनाती है, जिसे सख्ती से लागू नहीं किया जाता है। हमारा समाज व्यावहारिकता के नाम पर खोखला होता जा रहा है। आइटम सॉन्ग्स डिस्को में नहीं, बल्कि खेतों में फ़िल्मायें जा रहे हैं। आप इन गानों से गुज़रते हुए अलग दुनिया में चले जाते हैं। हमारी नज़रों से अनजान यह दुनिया चुपचाप फलफूल रही है। इनका अपना एक स्वतंत्र बाज़ार है। हालांकि, सारे गाने ऐसे नही हैं, लेकिन भोजपुरी सिनेमा इस जाल में फंस चुका है। यदा-कदा विरोध में आवाज उठने के बावजूद सरकार से लेकर समाज को इससे कोई सरोकार नहीं है।
 

गीतों को अश्लीलता की उंचाई पर ले जाने के लिए गायक-अभिनेता के साथ दर्शक-श्रोता भी हैं जिम्मेवार 

बिहारी फिल्मों में खासकर भोजपुरी सिनेमा जगत के दिग्गज ही भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता के जन्मदाता हैं। इन्होंने ही भोजपुरी में द्विअर्थी और खुले गानों का दौर लाया, जिसका अनुशरण आज के युवा गायक कर रहे हैं। ताकि, वे भी बेतुके और अश्लील गाने गाकर रातों -रात स्टार बन जायें। सुपरस्टार बनने का सपना संजोये ये नवोदित गायक एक-एक कर अपने गायन शैली के कपड़े उतार रहे हैं। इनकी गायन शैली इतनी गंदी हो गयी है कि शायद सुर की देवी सरस्वती को भी यह अफसोस होता होगा कि आखिर क्यों हमने सुर संगीत बनाया और अगर बनाया भी तो क्यों ऐसे लोगों के स्वर में मधुरता दी ? कोयल जैसी मधुर अवाज होने के बाद भी ये लोग कौवे जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा जगत के सुपरस्टार कहलाने वाले अभिनेता मनोज तिवारी ‘मृदुल’ ने भोजपुरी भाषी श्रोता वर्ग को अश्लील गानों का कई एलबम मनोरंजन के लिए दिया। इनकी मधुर आवाज में ‘बबुनी के लागल बा शहर के हवा’, ‘ तेरी गरमी दूर कर दूंगा’, ‘अइसन दिहलू पप्पी’, ‘मन होखे त बोलऽ नेवता पेठाई’, ‘बड़ी मुश्किल से भईलु तईयार’, ‘चल पोखरा में डूब के’, ‘हाफ पैन्टवाली’, ‘गोदिया में हमके लेल पिया’ जैसे गीत शामिल थे। भोजपुरी के सिनेमा के सिरमौर्य कहलाने वाले सुपरस्टार अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी भोजपुरी में अपनी गायकी से भोजपुरिया श्रोता वर्ग को अश्लीलता के सागर में खूब गोता लगवाया। इन्होंने अपने स्वर में ‘निरहुआ सटल रहे’, ‘सईंया लेके सुतल बा लवंडा’, ‘ काॅलेज के पीछे’, ‘ माल कचा कचवा बनिहें गोलगप्पा’, ‘ तनि दऽ तनि द ना हो’, ‘राखब डबल भतार’, ‘दोसर हेल गईल’, ‘ माल खोजे बुढ़वा’, ‘डाल उलट के’ जैसे गाने भोजपुरिया श्रोता वर्ग को दिये। वहीं, अश्लील गायकी के भागमभाग में सुपरस्टार कहलाने वाले अभिनेता पवन सिंह भी पीछे नहीं रहे। इन्होंने भी अपने द्विअर्थी और खुलेपन वाले गीतों से भोजपुरिया श्रोतावर्ग का कम मनोरंजन नहीं किया। इन्होंने अपने हिट गीत ‘लालीपप लागेलू’ के साथ ‘सटऽ ए राजा’, ‘मार दी कवनो बम’, ‘मन करेला चुसे के होठवा’, ‘ ए हो फुलझरी’, ‘ऐ मुखिया जी मन होखे तऽ बोलीं’, ‘ढोढ़ी तरे बा दुखात’, ‘देखे वाला चीज बा ओढ़निया में’, ‘ई तऽ नया चीज हऽ’, ‘ए रसिली होऽ’, ‘सईंया जी के कोरा’, ‘जिय जिय ए समान’, ‘मजा लेलऽ माल पटाके’, सहित कई द्विअर्थी और अश्लीलता से सराबोर गाने दर्शकों के बीच प्रस्तुत किया। इतना हीं नहीं, इनके कई भोजपुरी फिल्म में ऐसे दृश्य होते हैं जिसे सपरिवार नहीं देखा जा सकता है। इनके द्वारा अभिनीत फिल्म के पोस्टर भी अश्लीलता से भरे पड़े होते हैं। भोजपुरी गीत-संगीत व सिनेमाओं में अश्लीलता फैलाने वाले गायकों-अभिनेताओं की एक लम्बी सूची है। जिसमें खेसारी लाल यादव, रवि किशन, अरविन्द अकेला उर्फ़ कल्लू, राकेश मिश्रा, रानी चटर्जी, मोनालिसा, अंजना सिंह, अक्षरा सिंह, कल्पना, प्रियंका पंडित समेत अन्य शामिल हैं। आज भोजपुरी की जो स्थिति है उसके लिए भोजपुरिया श्रोता और दर्शक भी कम जिम्मेवार नहीं हैं। इन्हें जैसा मिल रहा है उसे स्वीकार कर रहे हैं। जिससे निर्माता-निर्देशक-गायक-अभिनेता-अभिनेत्रियों का ध्यान अश्लीलता की ओर केन्द्रित होते जा रहा है। यदि भोजपुरिया दर्शक और श्रोता अश्लील और अभ्रद गानें व फिल्मों को अस्वीकार कर दें, तो बहुद हद तक इस पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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लोकगीतों को बचाने के लिए करना होगा अश्लीलता का पुरजोर विरोध

आज के दौर में जितनी भी भोजपुरी फिल्में बन रही हैं, उनमें पारंपरिक गीतों का ख़याल नहीं रखा जा रहा है। इन फिल्मों में अधिकतर आइटम सॉन्ग्स से काम चलाया जा रहा है। कुछ गीत बनते भी हैं तो सुगम संगीत होता है, न कि लोकगीत। भोजपुरी और मैथिली के क्लासिकल लेखकों को भूलाया जा रहा है। लोगों को भी अश्लीलता का पुरजोर विरोध करना होगा। इससे कलाकार भी अपनी जड़ों की ओर लौटेंगे। विगत दिनों बिहार के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों ने गीत-संगीतों में अश्लीलता को लेकर कई बार विरोध-प्रदर्शन भी किया है। लड़कियों ने विरोध के जरिये मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की थी कि वे अश्लील गानों को बंद करा दें, या अपनी साइकिल वापस ले लें। वहीं, अश्लीलता मुक्त भोजपुर एसोसिएशन समेत कई सामजिक संगठनों ने  भी आगे बढ़कर लगातार विरोध किया था। बहरहाल, सरकार अबतक कड़े कदम नहीं उठा पा रही है।

 

फूहड़ता और अश्लीलता की भाषा नहीं है भोजपुरी

भोजपुरी गानों का नाम जेहन में आते ही हमारे अंदर कई तरह के भाव पैदा होने लगते हैं। मसलन, भोजपुरी गाने अश्लील होते हैं, कामुक होते हैं और काफ़ी फूहड़ होते हैं। लोग ऐसा कहते हैं कि भोजपुरी गाने अश्लीलता की सारी हदें पार कर देते हैं। कुछ हद तक ये सही भी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पूरी भोजपुरी इंडस्ट्री में ऐसे ही गाने बनते हैं या फिर बनते आए हैं। भोजपुरी में प्यार, विरह, निर्गुण और सोहर को जितनी खूबसूरती के साथ परोसा गया है, शायद ही वो बॉलीवुड के गानों में सुनने को मिले। भोजपुरी गानों ने जीवन के हर रंग को अपनी भाषा में खूबसूरती से उतारा है। लेकिन, आज का ज़माना कुछ ऐसा है कि गंदी और बुरी चीज़ों को लोग अधिक पसंद और वायरल करते हैं। भोजपुरी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। 

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