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बिहार में अब पुरुषों व महिलाओं की औसत आयु बढ़कर हुई बराबर

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Posted on: 14 Jun, 2018 Tags  

BiharonWeb: 14 Jun, 2018,

- इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च समेत 100 से अधिक संस्थाओं ने मिलकर किया हेल्थ बर्डेन पर शोध

大富豪国际网址 विश्वभर में बिहार ही एकमात्र राज्य था, जहां पुरुषों की तुलना में महिलाओं की औसत आयु कम थी। शोध से पता चला है कि बिहार में वर्ष 1990 से वर्ष 2016 के बीच पुरुषों के साथ महिलाओं की औसत आयु में बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही बिहार में पुरुषों व महिलाओं की औसत आयु समान हो गयी है। जहां महिलाओं की औसत उम्र 57.9 वर्ष से बढ़कर 67.7 वर्ष हो गयी है, वहीं पुरुषों की औसत उम्र 58.9 वर्ष से बढ़कर 67.7 वर्ष हो गई है। विश्व या देश के विभिन्न राज्यों में भी महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से अधिक होती है। जबकि, बिहार में यह आंकड़ा बराबर हो गया है। यह जानकारी हेल्थ बर्डेन पर हुए शोध के आधार पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व क्षेत्रीय सलाहकार डॉ धीरेंद्र नारायण सिंह ने बुधवार को प्रेस काॅन्फ्रेंस में दी। बता दें कि भारत सरकार के इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, आईएचएमई (यूएसए) व 100 से अधिक संस्थाओं ने मिलकर शोध किया था। शोध रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि देश में सिर्फ झारखंड ही ऐसा राज्य है जहां कि महिलाएं बिहार की महिलाओं से लगभग एक महीना ज्यादा जीवित रह सकती हैं। अन्य सभी राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं की औसत उम्र अधिक है। विश्व स्तर पर किए गए शोध टीम में शामिल 200 वैज्ञानिकों में एक डॉ. धीरेन्द्र नारायण सिंह ने बताया कि यह रिपोर्ट नवंबर 2017 में तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से चार साल अधिक और भारत में तीन साल अधिक होती है। कहा कि बिहार में अभी भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को समान अवसर नहीं मिल रहा है। खान-पान, दवा या सुख-सुविधा जैसी अन्य जरूरी चीजों में समान अवसर नहीं मिलने के कारण ही अब भी बिहार की महिलाओं की औसत उम्र पुरुषों से अधिक नहीं हुई है। जो भी बढ़ोतरी हुई है, बहुत ही धीमी है। बिहार में वर्ष 1990 में औरतों की औसत उम्र 57.9 वर्ष थी, जो वर्ष 2016 में बढ़कर 67.7 हो गई है। वहीं, इसी अवधि में पुरुषों की औसत उम्र 58.9 थी, जो बढ़कर 67.7 वर्ष हो गयी है। जबकि, इस मामले में झारखंड में इसी अवधि में पुरुषों की औसत उम्र 67 वर्ष और महिलाओं की औसत उम्र 67.8 वर्ष हो गयी है।

डायरिया से मरने वालों की संख्या हुई आधी, फिरभी सबसे अधिक

डॉ. धीरेन्द्र नारायण सिंह ने बताया कि अाज भी बिहार में सबसे अधिक मौतें डायरिया के कारण होती हैं। हालांकि, डायरिया से मृत्यु का आंकड़ा 14.1 फीसदी से घटकर 7.1 फीसदी पर पहुंच गया है। फिरभी, लगभग एक दहाई मौतें डायरिया से ही हो रही है। लकवा की बीमारी 2.7 फीसदी से बढ़कर 3.9 फीसदी पर पहुंच गई है। हृदय रोग 2.8 फीसदी से बढ़कर 6.6 फीसदी हो गया है। जबकि, शिशु व माताओं के कुपोषण में कमी आई है। फिरभी, 22 फीसदी मृत्यु व बीमारियां कुपोषण के कारण ही हो रही हैं।

रोग के भार में आयी कमी

डॉ. धीरेन्द्र नारायण सिंह ने बताया कि इसी अवधि में बिहार में रोग के भार में 37.9 फीसदी की गिरावट आयी है। जबकि, देश स्तर पर यह गिरावट 36 फीसदी की रही है। यह आंकलन डिसेबिलिटी एडजस्टेड लाईफ इयर्स का सूचकांक है। जिसमें असामयिक मृत्यु और बीमारियों की संख्या से मरीजों को होने वाली क्षति के आधार पर बीमारियों के भार में कमी या बढ़ोतरी की गणना की जाती है। शोध रिपोर्ट के तहत बिहार में होने वाली बीमारियों के कारणों में दूसरे स्थान पर अशुद्ध जल था, जो गिरकर 5वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं, वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियां वर्ष 1990 में 12.7 फीसदी थी, जो वर्ष 2016 में घटकर 11.6 फीसदी हो गयी है।
 

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