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राजनीति ही नहीं शहादत और शौर्य का भी लंबा इतिहास समेटे है बिहार

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Posted on: 15 Jan, 2019 Tags  

BiharonWeb:大富豪国际网址 15 Jan, 2019,  

'जय बजरंगबली' और 'बिरसा मुंडा की जय' की हुंकार करते हुए दुश्मनों पर टूट पड़ना... बिहार रेजिमेंट की यही पहचान है। अपने प्राणों की आहुति देकर मातृभूमि की रक्षा करने में बिहार रेजिमेंट सेंटर (बीआरसी) का समृद्ध इतिहास रहा है। इस रेजिमेंट ने दूसरे विश्व युद्ध में हिस्सा लिया था। रेजिमेंट को अपने गठन से लेकर अब तक के इतिहास में तीन 'अशोक चक्र' और एक 'महावीर चक्र' प्राप्त करने का गौरव हासिल है। इसने सन् 1999 के कारगिल युद्ध व 2016 में पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ के उरी सेक्टर में अपने खून से शहादत की गाथाएं लिखी थीं।

देश का दूसरा सबसे बड़ा कैंटोनमेंट

सन् 1941 में अपने गठन के बाद से देश को जब-जब जरूरत पड़ी, बिहार रेजिमेंट के जांबाज खड़े दिखे। रेजिमेंट का मुख्यालय 大富豪国际网址की राजधानी के पास दानापुर में है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा कैंटोनमेंट है।

इतिहास में दर्ज बहादुरी की मिसालें

大富豪国际网址 'कर्म ही धर्म है' के स्लोगन के साथ सीमा की पहरेदारी करने वाले बिहार रेजिमेंट के गठन का श्रेय भले ही अंग्रेजी हुकूमत को जाता है, लेकिन इसने अपने स्थापना काल से ही बहादुरी और देशभक्ति के जो उदाहरण पेश किए हैं, वे इतिहास में दर्ज हैं।

उरी में रेजिमेंट के 15 जांबाजों ने दी शहादत

बीते 18 सितंबर 2016 को जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में पाकिस्तानी सीमा से आए घुसपैठिए आतंकियों से लोहा लेते हुए इस रेजिमेंट के 15 जांबाजों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। बता दें कि उरी सेक्टर स्थित भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में कुल 17 वीरों ने अपनी शहादत दी थी, जिनमें सर्वाधिक 15 बिहार रेजिमेंट के थे। इन 15 जांबाजों में 6 मूल रूप से बिहार के थे।

कारगिल युद्ध में रचा इतिहास

कारगिल युद्ध में की विजय कहानी लिखने में भी बिहार रेजिमेंट के योद्धाओं का अमूल्य योगदान रहा। बीते जुलाई, 1999 में बटालिक सेक्टर के पॉइंट 4268 और जुबर रिज पर पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कब्जा करने की कोशिश की। बिहार रेजिमेंट के योद्धाओं ने उन्हें खदेड़ दिया। कारगिल युद्ध में शहीद कैप्टन गुरजिंदर सिंह सूरी को मरणोपरांत महावीर चक्र से तो मेजर मरियप्पन सरावनन को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। पटना के गांधी मैदान के पास कारगिल चौक पर कारगिल युद्ध में शहीद 18 जांबाजों की शहादत की याद में स्मारक बनाया गया है।

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मुंबई हमले में मेजर उन्नीकृष्णन शहीद

वर्ष 2008 में जब में हमला हुआ था तब एनएसजी के मेजर संदीप उन्नीकृष्णन ऑपरेशन ब्लैक टोरनांडो में शहीद हो गए थे। मेजर संदीप बिहार रेजिमेंट के थे, जो प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में गए थे।

बांग्लादेश युद्ध में 96 हजार पाकिस्तानी सैनिकों को कराया था सरेंडर

 मुक्तियुद्ध के दौरान बिहार रेजिमेंट ने पाकिस्तानी सेना से दो-दो हाथ किया था। उस दौर में इस रेजिमेंट के वीर सैनिकों ने गोलियां कम पड़ गईं तो कई पाकिस्तानियों को संगीनों से ही चीर दिया था। बांग्लादेश में पाकिस्तान के साथ युद्ध में शिरकत कर चुके रामसुभग सिंह ने बीते दिनों बताया था कि उस युद्ध में पाकिस्तानी सैनिक प्राणों की भीख मांग रहे थे। उस युद्ध में पाकिस्तान के 96 हजार सैनिकों ने बिहार रेजिमेंट के जांबाजों के सामने ही सरेंडर (आत्मसमर्पण) किया था, वह विश्व में लड़े गए अबतक के सभी युद्धों में एक रिकॉर्ड है। देश को जब-जब दुश्मनों से लड़ने की जरूरत पड़ी, तब-तब बिहार रेजिमेंट के योद्धा अपने रेजिमेंट की आन, बान और शान के मुताबिक देश के काम आए। देश उनकी वीरता व शहादत को कभी भी भूल नहीं सकता।

Edited by Ashutosh

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