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विष्णु भक्ति के लिए भादो माह है सर्वश्रेष्ठ

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Posted on: 05 Sep, 2018 Tags  

BiharonWeb: 05 Sep, 2018,

श्रावण मास की तरह भाद्रपद मास भी है पवित्र

भगवान शिव के प्रिय महीने श्रावण के बाद अब भगवान श्री कृष्ण की अराधना करने का महीना यानि भाद्रपद मास 27 अगस्त से शुरू हो चुका है। बिहार समेत पूरे देश में यह माह भी सावन की ही तरह बेहद पवित्र माना जाता है। भाद्रपद चातुर्मास में आने वाला दूसरा महीना होता है। योगेश्वर कृष्ण का जन्म भाद्र मास में ही अष्टमी को अर्ध रात्रि अर्थात 12 बजे रात में हुआ था। कृष्ण परम ब्रह्म हैं। गीत, नृत्य और संगीत से कृष्ण को प्रसन्न करना आसान है। भाव पूर्वक भक्त कृष्ण जन्मोत्सव, गोपियों से कृष्ण की रासलीला के गीत और भगवान की बाल लीलाओं का गान करते हैं। भादो का महीना विष्णु भक्ति और वैष्णव भक्ति प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माह है। इस माह में विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ अत्यंत लाभकारी होता है। जिस माह में भगवान का जन्म होता है उस मास की महत्ता सर्वोपरी होती है। इस माह श्री कृष्ण मंदिर में संतान गोपाल का अनुष्ठान कराने से संतान की प्राप्ति होती है। यदि आपकी संतान का मन अध्ययन से उचट रहा है तो श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ कराना लाभकारी होता है। इस माह में संतान प्राप्ति के लिए अनुष्ठान और पूजन का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इसी महीने में तीज का व्रत भी आता है जो सुहागिन महिलाएं पति के दीर्घायु के लिए रखती हैं और शिव की पूजा करती हैं। इस प्रकार इस माह में भी शिव की पूजा की जाती है। बिना शिव पूजा के तो कल्याण संभव ही नहीं है। इसी माह में ही श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बाद गणेश चतुर्थी मनाया जाता है। इस बार 13 अगस्त को गणेश चतुर्थी है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत आदि किया जाता है।

व्रतों व पर्व को लेकर भादो मास का विशेष महत्व

बिहारी संस्कृति में भादो मास का विशेष महत्व है। इस मास में पड़ने वाले पर्व व्रत व त्योहारों की एक अलग ही पहचान व महत्ता है। इस वर्ष यह 27 अगस्त से शुरू हो चुका है और 25 सितंबर तक रहेगा। हिंदू धर्म में अनेक पर्व और त्योहार मनाए जाते हैं। हर साल चौबीस एकादशियां होती हैं, जिसमें से भाद्रपद के कृष्णपक्ष में आने वाली एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। इस बार अजा एकादशी 6 सितम्बर को है। कहते हैं कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत व रात्रि जागरण करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनुष्य को स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत में एकादशी की कथा सुनने भर से ही अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है। इसी माह में हरितालिका तीज का प्रसिद्ध व्रत व पर्व 12 सितंबर को मनाया जएगा। सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अखंड सौभाग्य के लिए इस अत्यंत कठिन व्रत को श्रद्धा विश्वास के साथ निराहार व निर्जला रहकर पूरा करेंगी। विश्वकर्मा पूजा का प्रसिद्ध पर्व 17 सितंबर को होगा व इसी दिन कन्या संक्रांति पूजा भी होगी। अनंत चतुर्दशी का पवित्र पर्व 23 सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं, भाद्रपद पूर्णिमा व्रत 25 सितंबर को होगा।

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स्नान, दान, श्राद्ध के लिए पवित्र है भाद्रपद माह

大富豪国际网址 चातुर्मास धार्मिक और व्यावहारिक नजरिए से जीवनशैली में संयम और अनुशासन अपनाने का काल है। इसलिए इस अवधि में आने वाले भाद्रपद माह का भी बहुत महत्व है। हालांकि, इस मास में अनेक लोक व्यवहार के कार्य निषेध होने से यह माह शून्य मास भी कहलाता है। इसमें नए घर का निर्माण, व्यापार, विवाह, सगाई आदि मंगलकार्य शुभ नहीं माने जाते। वहीं, इस मास में हिन्दू धर्म के अनेक बड़े व्रत, पर्व व उत्सव भी मनाए जाते हैं। जिनमें भगवान श्रीकृष्ण, श्री गणेश, सूर्य, विष्णु, शिव की उपासना की पवित्र तिथियां शामिल है। इसलिए यह मास स्नान, दान, श्राद्ध के लिए पवित्र काल है। इस माह के हिंदू पर्व, उत्सवों में प्रमुख है - श्री कृष्ण जन्माष्टमी, श्री गणेशोत्सव, हर तालिका तीज। इन पर्व, उत्सवों ने सदियों से भारतीय धर्म परंपराओं और लोक संस्कृति को समृद्ध किया है। हिंदू धर्म परंपराओं में इस माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी कर्म का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मनाया जाता है तो शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश का जन्मोत्सव होता है। इस प्रकार यह मास कर्म और बुद्धि के संतुलन और साधना से जीवन में सफलता पाने का संदेश लेकर भी आता है।

ये हैं इस माह के पर्व

2 सितम्बर (रविवार)- जन्माष्टमी
6 सितम्बर (गुरुवार)- अजा एकादशी
7 सितम्बर (शुक्रवार)- प्रदोष व्रत (कृष्ण)
8 सितम्बर (शनिवार)- मासिक शिवरात्रि
9 सितम्बर (रविवार)- श्रावण अमावस्या
12 सितम्बर (बुधवार)- हरतालिका तीज
13 सितम्बर (गुरुवार)- गणेश चतुर्थी
17 सितम्बर (सोमवार)- विश्वकर्मा पूजा व कन्या संक्रांति
20 सितम्बर (गुरुवार)- परिवर्तिनी एकादशी
22 सितम्बर (शनिवार)- प्रदोष व्रत (शुक्ल)
23 सितम्बर (रविवार)- अनंत चतुर्दशी
大富豪国际网址 25 सितम्बर (मंगलवार)- भाद्रपद पूर्णिमा व्रत

Edited by Ashutosh

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